Khamosh Iqraar ⚜️
दिल्ली की बेतहाशा भीड़ और दो अजनबियों की खामोश दुनिया। शिवानी, जिसके गिटार की धुन पारिवारिक उम्मीदों के शोर में दब गई है, और आरव, जो बैंक की फाइलों और 'आदर्श बेटे' के बोझ तले अपनी पहचान खो चुका है। एक arranged रिश्ता उन्हें साथ तो ले आया, लेकिन क्या साथ रहना ही करीब होना होता है? क्या हर तय किया गया रिश्ता सिर्फ समझौता होता है... लेकिन क्या ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे ये दो अजनबी, एक-दूसरे की अधूरी धुन मुकम्मल कर पाएंगे? क्या लगता है आपको की ये दो खामोश लोग, बिना इज़हार किए भी एक-दूसरे की दुनिया बन पायेंगे? • यह कहानी उन लोगों के लिए, जो जानते हैं कि सच्चा साथ, बड़े वादों से नहीं… छोटी ख़ामोश परवाहों से बनता है। जानने के लिए पढ़िए — ✨ "Khamosh Iqraar" ✨


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